न्यूजीलैंड से भारत का हारना
क्रिकेट अनिश्चितता का खेल है। किसी मैच मे कोई शतक ,दोहरा शतक तो अगले ही मैच मे शुन्य पर आउट हो जाता है। बालर एक मैच मे बहुत कम रन देकर पांच-छः विकेट लेता है पर दुसरे ही मैच मे बिना विकेट लिए काफी रन दे देता है। कभी कोई फिल्डर नामूमकिन कैच पकड़ लेता है तो कभी आसान सा कैच भी ड्राप कर देता है। इनसब का मतलव यह नही कि क्रिकेट का खेल बिल्कुल ही भगवान् भरोसे है। इसमें भी भारी तकनीक है, काफी वैरीयेवलस है जिसे समझने के लिए एक दशकों कड़ी मेहनत और दिमाग लगाना पड़ता है। गवासकर, कपिलदेव, तेंदुलकर, गांगुली, बेदी, प्रसन्ना, चंद्रशेखर, धोनी .....का नाम ऐसे ही नही है। पर एक चुक हूई और आप गए।
इसमे मौसम का भी बड़ा रोल है। मौसम शुष्क है आद्र है।हवा तेज है धीमा है। एक बार किसी चेन्नई मे हो रहे टेस्ट मैच मे वेंकटराघवन बालिंग कर रहे थे उन्हें सफलता नही मिल रहा था । कुछ देर बाद उन्हें दूसरे तरफ से लगाया गया तो सभलता मिलने लगी। बाद मे जानकारी आयी पहले छोर से हवा का रूख बाधक था जबकि बही दूसरे छोर से सहायक हो गया। कोई बालर आद्र मे तो कोई शुष्क मे ,कोई नयी बाल मे तो कोई पुरानी बाल या सफल होता है।
एक कैप्टन को और टीम को सभी बातों का ख्याल रखना होता है। एक सुझ आपको मैच जिता देगी एक चुक मैच हरा देती है।
न्यूजीलैंड के साथ हो रहा मैच मे पहला दिन वर्षा नही होता और मैच उसी दिन समाप्त होता तो भारत की जीत होती।पर वर्षा हुआ ,मैच दूसरा दिन वहीं से शुरू हुआ ।न्यूजीलैंड के दो तीन विकेट धड़ाधड़ गिरे भारत को होशियार हो जाना चाहिए था। पर हो गई चुक ।विकट गिरने लगे।नामी लोग पवेलियन लौट गये।
जब पहला विकेट रोहित का गिरा था तो मौसम को देखते हुए विराट को मैदान पर जाना एक चुक था , वाचमैन के रुप मे पांड्या को भेजना अच्छा होता ,कुछ देर टिकता तो रन भी बनता और मौसम मे भी सुधार होता। पांड्या अच्छा खेला पर दबाव मे आ गया।मारने के चक्कर मे विकेट गंवा दिया।अनुभव की कमी के कारण ऐसा हुआ। जाडेजा अच्छा खेला।तारीफ करनी होगी। धोनी को कुछ पहले तजी लानी चहीये था।दूसरे रन का रिस्क घातक हुआ।
दूसरे सेमीफाइनल मे उम्मीद के मुताबिक ही इंगलैंड की जीत हुई। इंगलैण्ड एक मजबूत टीम है और फाइनल मे भी इंगलैण्ड के जितने की प्रबल संभावना है।